अन्नदा
1. देंनंदिन जीवन में स्वदेशी: बड़ी-बड़ी बातें समझाने की बजाय आम व्यक्ति को बताया जाए कि स्वदेशी का उसके जीवन पर उसके वातावरण पर उसके परिवार पर क्या अच्छा प्रभाव जमीन का पड़ेगा इससे वह ज्यादा स्वदेशी के निकट आएगा धीरे-धीरे उसको अपने जिले अपने प्रांत या शुरू में अपने गांव के बारे में बताया जाए।
2. छोटी बातों की, स्थानीय मुद्दों की ओर ध्यान: देशभर में चले स्वदेशी के आंदोलनों के बारे में तो अवश्य बताछोटी बातों की, स्थानीय मुद्दों की ओर ध्यान जाए परन्तु साथ-साथ उसे यह भी जानकारी दी जाए कि पहला काम उसको अपने आसपास में कहां आंदोलन की आवश्यकता है। यह देखना है कि कहां वृक्ष काट रहे हैं, कि कहां कचरा डाला जा रहा है, कि कहां आसपास में दुकानदारों द्वारा लूट हो रही है, कि कहां नदी को नुकसान पहुंचाया जा रहा है कि कहां अपने गांव इस सड़कें अनावश्यक तोड़ी जा रहे हैं आदि आदि बातों पर ध्यान देंगे तो धीरे-धीरे लोग उससे जुड़ते जाएंगे और वह काम में सफल होगा। देश भर के ऐसे अपने लोगों के व बाहर के लोगों के उदाहरण इकठ्ठा करना।
3. उसकी शिकायत है की आपसी सलाह मशवरा ज्यादा नहीं किया जाता। इन्हीं एक दो व्यक्तियों के कहने पर योजना बनाई जाती है। उनको आगे किया जाता है और सब की नहीं सुनी जाती है जो निर्णय हो, वह सामूहिकत जो पहले से है, उसे बचाया व बढ़ाया जाए।
4. जिलों के काम को बढ़ाने के लिए सक्रियता बढ़ाने के लिए सबसे पहले आवश्यक है कि कोई व्यक्ति वहां प्रवास करें जाए उस बहाने से सब काम धीरे-धीरे होने लग जायेंगे।
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