Monday, March 2, 2020

मेरा परिचय

कश्मीरी लाल (18.5.1951)
आप स्वदेशी जागरण मंच के गत 13 वर्षों से (2007 से)राष्ट्रीय संगठक हैं  और दिल्ली में केंद्र है। आप स्वदेशी, स्वालम्बन और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित हैं और पिछले 35 वर्षों से इन्ही में इर्दगिर्द कई जनजागरणों, रचनात्मक क्रियाकलापों व जनआंदोलनों का तानाबाना बुनते रहे हैं। 
मूलतः हरियाणा में अम्बाला में 1951 में जन्मे और उधर ही अंग्रेजी साहित्य व दर्शन शास्त्र में स्नातकोत्तर पढ़ाई की, अल्पकाल के लिए शिक्षण भी किया । सन 1984 से पूर्णकालिक रूप से संघ के प्रचारक के नाते राष्ट्रकार्य में जुट गए। आजकल हमारे देश का युवा सद्संस्कारों के साथ- साथ 'नोकरी मांगने वाला नहीं बल्कि नोकरी देने वाला बने' इस भाव को जनांदोलन बनाने में जुटे हैं। पूरे देश में अनवरत यायावरी करते हुए युवा, समाज व सरकारों को पूरे मंच के साथ सफलतापूर्वक झकझोरने को संकल्पित हैं।
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शताब्दी वर्ष संकल्प

संकल्प:
1. एंड्राइड पर आधा घण्टा से ज्यादा नहीं।
2. सभी जिलों में काम शताब्दी वर्ष में।
3. पूर्णकालिक निकलने, परेफरेंस
4. हर प्रान्त और कोई 100 ज़िले जिनके सब विस्तृत जानकारी रखनी, सप्ताह में अपडेट करना।
5. अपने प्रवास की बात सबतक रखनी है।
6. कोई प्राथमिकता स्थान के बारे में।

विपिन राणा

विपिन जी
1. दो तीन साल ईर्ष्या द्वेष में अनावश्यक गुजारे, आगे ऐसा न हो। नकारात्मकता को बाई बाई।
2. अभी 6 पुराने सम्पर्क के जिलों में 100 के लगभग अच्छे व्यक्तिगत परिचय को संगठन की ताकत के नाते बदलना।
3. जितने भी क्षेत्र में संघर्ष वाहिनी प्रमुख हैं उनके नाम, फ़ोन, बाद में पते आदि इकठ्ठे करना और उनके विकास मि चिंता।
4. ठेंगड़ी जी का भाषण स्वदेशी ही समाधान की ऑडियो सभी सुनें संघर्ष वाहिनी प्रमुख। उन्हें सर्वसमावेशी स्वदेशी पुस्तक ऑनलाइन भेजना व पूछताछ।
5. अपनी आर्थिक स्थिति के सुधार के उपाय व संघ के  प्रान्त की मानदेय बहाली।
6. मास में एक बार सतीश जी के साथ दिल्ली बैठना व आगामी मास की योजना बनाना। अन्नदा जी से भी संपर्क व आगे उनका प्रवास लेना।
7. संघर्ष वाहिनी के विषय तैयार करना, जयपुर कार्यशाला के नोटस ढूंढना, इस विषय पर अध्ययन बढ़ाना।
8. आत्म विकास के लिए कोई अच्छि पुस्तक पढ़ना।
9. अपने  एकाग्रता के ज़िले है न, नोएडा, गाज़ियाबाद व सहारनपुर। सुधांशु जी संभल व अमरोहा। बिजनोर अन्य घरेलू ज़िला है। इन्हें सघन प्रयास कर अच्छे सक्रिय करना। 

annada

अन्नदा
1.  देंनंदिन जीवन में स्वदेशी: बड़ी-बड़ी बातें समझाने की बजाय आम व्यक्ति को बताया जाए कि स्वदेशी का उसके जीवन पर उसके वातावरण पर उसके परिवार पर क्या अच्छा प्रभाव जमीन का पड़ेगा इससे वह ज्यादा स्वदेशी के निकट आएगा धीरे-धीरे उसको अपने जिले अपने प्रांत या शुरू में अपने गांव के बारे में बताया जाए।
2.  छोटी बातों की, स्थानीय मुद्दों की ओर ध्यान: देशभर में चले स्वदेशी के आंदोलनों के बारे में तो अवश्य बताछोटी बातों की, स्थानीय मुद्दों की ओर ध्यान जाए परन्तु  साथ-साथ उसे यह भी जानकारी दी जाए कि पहला काम उसको अपने आसपास में कहां आंदोलन की आवश्यकता है।  यह देखना है कि कहां वृक्ष काट रहे हैं, कि कहां कचरा डाला जा रहा है, कि कहां आसपास में दुकानदारों द्वारा लूट हो रही है, कि कहां नदी को नुकसान पहुंचाया जा रहा है कि कहां अपने गांव इस सड़कें अनावश्यक तोड़ी जा रहे हैं आदि आदि बातों पर ध्यान देंगे तो धीरे-धीरे लोग उससे जुड़ते जाएंगे और वह काम में सफल होगा। देश भर के ऐसे अपने लोगों के व बाहर के लोगों के उदाहरण इकठ्ठा करना। 
3. उसकी शिकायत है की आपसी सलाह मशवरा ज्यादा नहीं किया जाता। इन्हीं एक दो व्यक्तियों के कहने पर योजना बनाई जाती है। उनको आगे किया जाता है और सब की नहीं सुनी जाती है जो निर्णय हो, वह सामूहिकत जो पहले से है, उसे  बचाया व बढ़ाया जाए।
4.  जिलों के काम को बढ़ाने के लिए सक्रियता बढ़ाने के लिए सबसे पहले आवश्यक है कि कोई व्यक्ति वहां प्रवास करें जाए उस बहाने से सब काम धीरे-धीरे होने लग जायेंगे
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