रिसर्च
1. 13.1.21 को माने भगवती जी को मिले और उन्होंने आईसीएसआर का एक प्राइवेट रिसर्च सेंटर जयपुर में एक आईएएस ऑफीसर चलाते हैं वह देखने को कहा प्रोग्राम। और साथ ही मेहरोत्रा जी से बात करके अन्य दिल्ली स्थित रिसर्च सेंटर के देखने के लिए भी कहा। इसी प्रकार विभिन्न विश्वविद्यालय से एमओयू साइन करना और धीरे-धीरे उनके यहां क्या रिसर्च हो रही है उस को प्रभावित करना और उसके लिए अपने यहां भी एक व्यक्ति को बिठाना जो इन विषयों को सुमित आ जाए देखता जाए। क्रमांक 2 आज एक राज्यसभा सांसद श्री अश्विनी वैष्णव को मिलना हुआ जो राजस्थान से सांसद चुने गए हैं नहीं उड़ीसा से चुने गए हैं पुराने आईएएस ऑफीसर है एंट्री प्लस हैं देश विदेश से पढ़े हैं और कानपुर के आईआईटीएम है। पिछले 800 सालों में उन्होंने अपनी अर्थशास्त्र पर अच्छी पकड़ बनाई है और अर्थव्यवस्था कैसे आगे बढ़े रोजगार कैसे मिले इस पर फोर्स अध्ययन किया है। उनका सुंदरम जी के माध्यम से मिलना हुआ। क्रमांक 3 आज ही चौपाल कार्यालय पर बैठना हुआ विजय गोयल जी व प्रदीप चौहान जी के साथ और साप्ताहिक उनका अपना प्रेजेंटेशन चलें मार्च में किसी एक प्रमुख व्यक्ति का प्रेजेंटेशन हो तथा जो भी बात उसने प्रकट करने हो पहले लिख कर के भेजे हैं। बाद में सुशील पंचाल के घर गए मनोज जी से बात हुई वाह स्वाति रविंद्र सोलंकी गए थे उनसे भी इस विषय पर बातचीत हुई। जल्दी ही यानी 7 फरवरी को या उसके आसपास मुरली जी के साथ मिलकर एक चौपाल की बैठक बुला ली जाए और आगे की दशा दिशा तय की जाए।
1 अप्रैल 21
माननीय भगवती जी के घर गए थे और उनका विचार था कि हमको 30 40 विशेष सिलेक्ट करके और उनके बारे में तीन चार व्यक्तियों की टीम बनाकर अभिषेक काम कर देना शुरू चाहिए। इससे पहले विजय कॉल जी ने लगभग 25 विषयों की सूची बनाई थी और यह सूची मैंने भगवती जी को भी दिखाई थी और मेरे पास अभी भी वह भी के लिखे हुए हैं बस उन पर टीम बनाना अति आवश्यक है। आज दिनांक 3 को अप्रैल को प्रवासी भवन में सीए से मिला और उन्होंने संकेत किया कीजिए सब काम मुझे ही करना चाहिए और महीने में 20 दिन यहां रह कर के कोडी डेट करना चाहिए फुल नाम तभी कुछ रिसर्च वर्क का लाभ होगा। श्री आंखें बारे में कहां की हो अच्छे ढंग से सरकारी लोगों से नहीं मिलते तो उन्होंने कहा कि आपको स्वयं मिलना चाहिए संबंध स्थापित करने चाहिए और नई-नई जानकारियां इकट्ठी करके फिर जिसको जहां भेजना है यह काम वैसा करना चाहिए। अपने साथी को महीने में 25 दिन प्रवास के लिए भेजो और आप आठ 10 दिन प्रवास बाकी समय यहां लगा कर के इन कामों पर कोऑर्डिनेटर करिए। आपका एक्सपोर्टर हो चुका है उनका करवाना चाहिए। मैंने जो कल्पना रखी उसमें यह था की अलग-अलग जगह पर जब प्रवास करते हैं तो वहां के लोगों की समस्याएं सुनते हैं वह कुछ साहित्य भी देते हैं परंतु उस पर कोई काम करने वाली टीम यहां नहीं होती है इसलिए कोई अनुवर्तन नहीं हो पाता। श्री आ का कहना है की मैं बहुत पहले से ही कहता आया हूं की रिसर्च की बहुत आवश्यक है और प्राइमरी डाटा हर चीज का अपने पास अपने माध्यम से आना चाहिए तभी कुछ बातचीत करने का लाभ दूसरे पक्षों से होता है।।